Sunday, 5 February 2012






क्या कहिये ऐसी हालत में कौन समझने वाला है 
सब की आँखों  पे  पर्दा है हर एक जुबां पर ताला है 

किस के आगे सर पटकें और चिल्लाये किस के आगे 
एक हाथ में छुपा है खंज़र ,   एक   से  जपते माला है 


करनी और कथनी में अंतर ,आसमाँ और ज़मीं का है 
कहते थे क्या क्या कर देगें,पर बस बातों   में  टाला है 





 (इस रचना की पहली पंक्ति किसी ब्लॉग पर मुशायरे में  ग़ज़ल लिखने
के लिए रखी गयी ,मैं ने कोशिश की पर क्यूकि मुझे ग़ज़ल के नियम पता नहीं 
है के कैसे लिखते है ,तो ये उस मुशायरे के नाकाबिल साबित हुई,यहाँ में इसे ग़ज़ल 
के रूप में नहीं सिर्फ अपनी एक रचना के रूप में रख रही हूँ )
(अवन्ती सिंह)

17 comments:

  1. har shakhsh yahee kar rahaa hai
    waqt kaa dastoor nibhaa rahaa hai
    chehre par chehraa chadhaa kar ghoom rahaa hai

    ReplyDelete
  2. किस के आगे सर पटकें और चिल्लाये किस के आगे
    एक हाथ में छुपा है खंज़र , एक से जपते माला है

    बिलकुल सही बात कही है आपने।

    सादर

    ReplyDelete
  3. किस के आगे सर पटकें और चिल्लाये किस के आगे
    एक हाथ में छुपा है खंज़र , एक से जपते माला है


    करनी और कथनी में अंतर ,आसमाँ और ज़मीं का है
    कहते थे क्या क्या कर देगें,पर बस बातों में टाला है


    Rajneton pr karara prhar kiya hai.....are bhai ye hain hi esi layak

    ReplyDelete
  4. अच्छा है..
    kalamdaan.blogspot.in

    ReplyDelete
  5. आपका प्रयास बेहतरीन है,चिंगारी भड़क रही है !

    ReplyDelete
  6. बेहतरीन प्रयास अवन्ती जी
    अच्छी रचना है..

    ReplyDelete
  7. बहुत अच्छे...
    गज़ल हो या गीत...
    भाव बेहतरीन है..
    शुभकामनाएँ.

    ReplyDelete
  8. हकीकत बयानी है।

    ReplyDelete
  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 06-02-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

    ReplyDelete
  10. सार्थक अभिवयक्ति......

    ReplyDelete
  11. कथनी और करनी में यदि अंतर न हो तब कुछ तो अच्छा होपाए पर ऐसा नहीं होता |बहुत सुन्दर बात कही है "
    कथनी और करनी में अंतर आसमां और जमीं का है |
    आशा

    ReplyDelete
  12. कोई नहीं जी निराश नहीं होते.....आपने बहुत अच्छा लिखा है शेरों में बहुत गहराई है......मेले झमेले से दूर ही रहे तो अच्छा है :-)

    ReplyDelete
  13. umda khayaal hain...badhai sweekar karen

    ReplyDelete
  14. ये तो वही वाला हिसाब है -दिन में माला जपत हैं ,रात हनत हैं गाय .बहुत अच्छी रचना है व्यंग्य प्रधान .

    ReplyDelete
  15. बात तो एकदम सही है. बधाई.

    ReplyDelete