Tuesday, 24 January 2012

सिवा तुम्हारे

तुम कब तक नकारते रहोगे मुझे 
मेरे उस अस्तित्व को ,जो कब का 
तुम में विलीन हो चूका है ......
और तुम मेरे होने ,न होने को सिर्फ
मेरे जिस्म की उपस्तिथि से आँक रहे हो 
झांको खुद में ,और देखो ,मैं तो तुम्हारे 
हृदय के सिघासन पर विराजमान हूँ 
और तुम्हारे सम्पूर्ण अस्तित्व ने स्वीकार 
कर लिया है मेरे साम्राज्य को ....
सिवा तुम्हारे..........

(अवन्ती सिंह)

50 comments:

  1. आग्रही समर्पण या कोई और शब्द, सर्वथा नया विचार।

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  2. लेकिन जब हम मिल जाते हैं,खो जाता है कौन।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया....आप को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई.....

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  3. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति

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    1. शुक्रिया Yashwant जी....

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया Amit जी....आप को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई

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  6. बहुत ही सुन्दर प्रस्‍तुति..

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया maheshwariजी....आप को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई

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  7. और तुम्हारे सम्पूर्ण अस्तित्व ने स्वीकार
    कर लिया है मेरे साम्राज्य को ....
    सिवा तुम्हारे..........
    वाह...बहुत ही प्रभावी अभिव्यक्ति

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया anju जी....आप को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई

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  9. बहुत खूब! बहुत सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति..

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया Kailash जी....आप को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई.......

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  10. बहूत हि बेहतरीन प्रभावशाली अभिव्यक्ती है --

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया Reena जी....आप को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई

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  11. ....इसको कहते हैं गाफ़िल की चेतना को ठकठकाना.....

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    1. शुक्रिया अशोक जी ,आप को यहाँ देख कर ख़ुशी हुई,उम्मीद है कुछ दिन में आप का ब्लॉग भी देखने को मिले हम लोगों को ,आप को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई..........

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  12. बहुत सुन्दर...आत्म में लींन होना ही सच्चा समर्पण है.....

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया vidya जी....आप को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई...

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  13. और तुम मेरे होने ,न होने को सिर्फ
    मेरे जिस्म की उपस्तिथि से आँक रहे हो
    झांको खुद में ,और देखो ,मैं तो तुम्हारे
    हृदय के सिघासन पर विराजमान हूँ
    और तुम्हारे सम्पूर्ण अस्तित्व ने स्वीकार
    कर लिया है मेरे साम्राज्य को ....
    सिवा तुम्हारे..........

    सुन्दर प्रस्‍तुति..

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया Punam जी....आप को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई....

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  14. भाब निश्चित हैं बहुत गहरे,
    जो हृदय में हो गये अंकित।
    डूबना कविता में स्वाभाविक,
    तारीफ के काबिल यह निश्चित।
    कृपया इसे भी पढ़े
    क्या यही गणतंत्र है

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    1. शुक्रिया..... ,आप ki rachna bahut hi umda hai....आप को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई..........

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  15. झांको खुद में ,और देखो ,मैं तो तुम्हारे
    हृदय के सिघासन पर विराजमान हूँ
    और तुम्हारे सम्पूर्ण अस्तित्व ने स्वीकार
    कर लिया है मेरे साम्राज्य को ....
    सिवा तुम्हारे..........
    BAHUT HI SUNDAR .....YATHARTH CHINTAN ...BADHAI AWANTI JI.

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    1. bahut -2 shukriya aap ka...आप सब को bhi गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई.....

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  16. बहुत गहरी संवेदना........सम्पूर्ण अस्तित्व और तुम में 'मैं' का भेद शेष है अभी..........बहुत ही सुन्दर.........हैट्स ऑफ इसके लिए |

    क्या आप फेसबुक पर भी हैं ?

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया....आप को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई..... जी मैं FB पर भी हूँ कैलाश जी ,यशवंत जी,अशोक जी हम सब एक ही मित्र मण्डली में है

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  17. बहुत ही गहरे भाव और संवेदनशील रचना.......

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    1. shukriya.....आप को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई.....

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  18. गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें
    vikram7: कैसा,यह गणतंत्र हमारा.........

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    1. आप को bhi गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई.....

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  19. गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ।
    ----------------------------
    कल 27/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया यशवंत जी....आप को bhi गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई....

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  20. सुन्दर कटाक्ष है.

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया Alka जी....आप को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई

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  21. गहरी संवेदनाएं.सुन्दर विचार.
    ब्लॉग पर होसला अफजाई का बहुत शुक्रिया.

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  22. बहुत सुंदर प्रस्तुति, गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाए...
    एक ब्लॉग सबका

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  23. Avanti ji, ek aur umda rachna!.. bahut pyara likha hai aapne! badhai...

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  24. सहज भाव किन्तु गहरे अर्थ संप्रेषित करता है .....!

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  25. और तुम्हारे सम्पूर्ण अस्तित्व ने स्वीकार
    कर लिया है मेरे साम्राज्य को ....
    सिवा तुम्हारे..........

    गहन भावों का बेहतरीन शब्द संयोजन .....

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  26. गहरे भाव।

    सुंदर रचना।

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  27. सुंदर अभिव्यक्ति..

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  28. संपूर्ण समर्पण ! बहुत सुंदर !

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  29. वाह ...बहुत खूब
    बसंत पंचमी की शुभकामनाएं....

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