Sunday, 22 January 2012

ऐ जिंदगी

अभी  तीर और चला ऐ जिंदगी 
अभी   सांस   मेरी   थमी   नहीं 

लडखडा तो गए है कदम मगर 
अभी  पाँव  ने छोड़ी जमी नहीं

अभी मेरी पीठ में, खंज़र कुछ 
और समा   सकते है,  ना  रुक 

कहर  और   बरपा  ऐ जिंदगी 
मुझ में हौसलों की  कमी नहीं 

(अवन्ती सिंह)


40 comments:

  1. बढ़िया प्रस्तुति...
    आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 23-01-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  2. एक बार फिर हम पर तेज़ाब डाला गया

    एक बार फिर

    हम पर

    तेज़ाब डाला गया

    हम पर

    लांछन लगाया गया

    हमारे चेहरे को

    झुलसाया गया

    चेहरे पर चेहरा चढ़ा

    बताया गया

    उन्होंने भी किया

    जो अब तक सबने किया

    वही समझा जो

    अब तक सबने समझा

    कसूर उनका नहीं

    हमारी किस्मत का है

    पहले से झुलसे चेहरे को

    छुपा कर रखने का

    गुनाह जो करते हैं

    निरंतर हँसते रहते हैं

    नए दोस्त बनाते हैं

    उनसे

    गले लग कर मिलते हैं

    साफ़ दिल का

    होते हुए भी मनों में

    शक पैदा करते हैं

    शक ने दुनिया को मारा

    हमको भी मारे

    तो क्या फर्क पड़ता

    फिर झुलसे चेहरे पर

    नया चेहरा चढ़ा लेंगे

    मन में रोते रहेंगे

    दिखाने को हँसते रहेंगे

    22-01-2012

    72-72-01-12

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  3. Replies
    1. koi baat nahi nirantar ji ,shukriya jo aap ne meri rachna pasnd aaee

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  4. साँस अभी बाकी है, आस अभी बाकी है...

    बहुत सुन्दर..

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  5. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

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  6. कहर और बरपा ऐ जिंदगी
    मुझ में हौसलों की कमी नहीं
    हौसला भर देने वाली,जोशीली रचना।

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  7. बहुत सुन्दर..
    ताकतवर रचना...

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  8. अभी मेरी पीठ में, खंज़र कुछ
    और समा सकते है, ना रुक

    कहर और बरपा ऐ जिंदगी
    मुझ में हौसलों की कमी नहीं

    बहुत सुंदर व मार्मिक भाव।

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  9. बहुत सुंदर कविता। मन को छू गयी । मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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  10. अभी मेरी पीठ में, खंज़र कुछ
    और समा सकते है, ना रुक

    कहर और बरपा ऐ जिंदगी
    मुझ में हौसलों की कमी नहीं \

    wah ......kya khoob likha hai ....sachmuch jindgi emthaan leti hai.

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  11. कहर और बरपा ऐ जिंदगी
    मुझ में हौसलों की कमी नहीं

    बहुत गहरी बात कह दी आपने इस रचना के माध्यम से।
    सच है, साहस ही जिंदगी है।

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  12. "लडखडा तो गए है कदम मगर
    अभी पाँव ने छोड़ी जमी नहीं"

    बहुत खूब!

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  13. कहर और बरपा ऐ जिंदगी
    मुझ में हौसलों की कमी नहीं


    बहुत सुंदर बात कही है. ऐसे समय ही असली पहचान होती है आदमी की.

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  14. .

    कहर और बरपा ऐ जिंदगी
    मुझ में हौसलों की कमी नहीं

    आपके हौसलों को सलाम !
    ज़िंदादिली से भरपूर प्रेरक रचना के लिए आभार !


    दुआएं हैं, आपकी ज़िंदगी तीर नहीं फूल बरसाए… आमीन !

    शुभकामनाओं सहित

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  15. हौसले से भरपूर रचना को नमन

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  16. बहुत सुन्दर आशावादी कविता |
    आशा

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  17. बहुत सुंदर कविता
    मन को छू गयी ।

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    1. mere dil ki bat kh di aisa padhkr lga.thanks.

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  18. हौसला हो तो जिंदगी को भी चैलेन्ज किया जा सकता है ..बहुत खूबसूरत रचना

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  19. बहुत खूब.......शानदार हैं सारे शेर|

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  20. Sundar rachna..Ek se badhkar ek sher...

    मेरे ब्लॉग में भी पधारें..
    मेरी कविता

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  21. कहर और बरपा ऐ जिंदगी
    मुझ में हौसलों की कमी नहीं

    वाह क्या जज्बा है ...बहुत सुन्दर !!!

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