Saturday, 12 May 2012

ऐ पहेली ,तुम खुद ही सुलझ जाओ 
हल हो जाओ ना  खुद ही
अगर तुम ने ऐसा ना किया तो अनबुझे रह जाने 
तैयारी रखना ,क्यूंकि उलझी हुई चीजे मेरे स्वभाव से मेल नहीं खाती है 
मैं अक्सर इस तरह की चीजों को स्टोर रूम के उस कोने में रख 
दिया करती हूँ जहां कभी कोई नहीं जाया करता 
(अवन्ती सिंह )
 

12 comments:

  1. बहुत ख़ूबसूरत हमेशा की तरह ...!

    ReplyDelete
  2. sundar aevam khoobsurat post .aaiye meri nai post ko aapka intajaar hae.

    ReplyDelete
  3. अरे बाप रे पहेली ... सुलझ जाओ वरना ...

    ReplyDelete
  4. बहुत बढ़िया

    ReplyDelete
  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    ReplyDelete
  6. उलझनों को ऐसे ही विदाई दे दें हम सब..

    ReplyDelete
  7. उलझनों का समाधान भी आवश्यक है. सुंदर प्रस्तुति.

    ReplyDelete
  8. सुन्दर रचना.....

    ReplyDelete
  9. सुंदर भाव पुर्ण अभिव्यक्ति ,...

    आवंती जी, आपने तो मेरे पोस्ट पर आना ही छोड़ दिया,...
    मुझे आपका फीड न मिल सकने के कारण पोस्ट पर नही आ सका...

    MY RECENT POST ,...काव्यान्जलि ...: आज मुझे गाने दो,...

    ReplyDelete
  10. उलझी हुई चीजे मेरे स्वभाव से मेल नहीं खाती है

    उलझन में उलझे बिना उलझन सुलझती भी तो नहीं है

    ReplyDelete
  11. baise uljhi hui cheejon ko hee suljhaane me maja aata hai..samtal raston per jindgi kaa safar bahut maja nahi deta hai..sunder prastuti ke liye sadar badhayee ..aapka blog join kiya aaur ummid karta hoon kee aap bhee mere blog se judengi aaur meri rachnaaon kee tamam kamjoriyon ko door karne hetu apne bahumulya sujhav bhee dengi..sadar badhayee aaur amantran ke sath

    ReplyDelete