Friday, 25 May 2012

क्यूँ   रहती   है माथे पे शिकन    हर    वक्त     आप   के ?
थोडा    हँसा    कीजिये   जनाब थोडा   मुस्कराया कीजिये 

थाली में सजी है कई सब्जियों की कटोरियाँ और पकवान 
एक टुकड़ा किसी भूखे की तरफ   भी तो   बढ़ाया कीजिये 

आलिशान मकान में क्या रहने लगे भूल गए  गरीबी   का   दर्द 
कभी किसी की झोपडी पर फूस का छप्पर तो डलवाया कीजिये 

बच्चे आप के मुंह खोले तो खोल देते है पर्स ,  करते    है  हर  फरमाइश   पूरी   किसी मासूम के फैले हाथ पर एक सिक्का रखने में भी मत कतराया कीजिये 

हर गम हो   जायेगा   कौसों   दूर ,  सारी    फिक्रें     हो    जायेगी काफूर 
माँ   के   दुखते   पांवों    कभी     कभी        तो         दबाया      कीजिये 
(अवन्ती  सिंह )


 

13 comments:

  1. जब हो लिखने का मन तो यूँ ही लिखते जाया कीजिये ....

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  2. काश आपकी बातें मान् ली जाएँ...................

    अनु

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  3. क्यूँ रहती है माथे पे शिकन हर वक्त आप के ?
    थोडा हँसा कीजिये जनाब थोडा मुस्कराया कीजिये ... वाह

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  4. bahut shandar.

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  5. अच्छी सलाह। उत्तम ध्यानाकर्षण।

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  6. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  7. अच्छी नसीहत देती रचना

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  8. बहुत सुंदर मन के भाव ...
    प्रभावित करती रचना .

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  9. औरों के बाटेंगे तो आपके दुख भी कम हो जायेंगे।

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  10. Maa ke Panv jaroor dabane chahiyen ... Neva milta hai ..

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  11. बहुत अच्छी -अच्छी बाते कही है आपने
    अगर इन्हें मान ले तो कोई तकलीफ ही ना रहे..

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