Thursday, 24 January 2013

सिर्फ चर्चा और बातें


आओ करें बाते राजनीति और मौसम  पर
चर्चा करें समाज में  हो  रहे  परिवर्तन पर! 

 बढ़ रहे भ्रष्टाचार पर,आम के आचार पर 
बदलती नीतियाँ और बदलते संस्कार पर! 

रेल पर, खेल  पर,  महंगे  होते   तेल  पर 
कुश्ती के दंगल पर,खत्म होते जंगल पर !

बाघों के शिकार पर ,हिरणों की हत्या पर 
करें  खूब   चर्चा ,  झूठ  और   सत्य  पर !

सडक के किनारे ठिठुरते कुछ बच्चों पर 
कभी बुरे लोगों पर और कभी अच्छों पर !

गीता के ज्ञान पर, धर्म  और  विज्ञान पर 
वहशी और इंसान पर ,औरों के ईमान पर !

क्या इन  चर्चाओं   से   कुछ बदल पायेगा 
कुछ ठोस करने को कदम कब उठ पायेगा! 

कुछ ठोस काम करने की सरकार की जिम्मेदारी है 
हम करेगे  चर्चा ,   हमे   चर्चा     की    बीमारी  है !

8 comments:

  1. करने की हैं कितनी बातें,
    कम पड़ते सब दिन, सब रातें।

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  2. बातों के बाद कुछ काम भी हो जाय तो बात बने.

    आपको गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनायें.

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  3. हम करेगे चर्चा , हमे चर्चा की बीमारी है ! :)

    सुन्दर :)

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  4. सार्थक पोस्ट .उम्दा .
    बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी ...बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!शुभकामनायें.
    आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.
    http://madan-saxena.blogspot.in/
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  5. हमे चर्चा की बीमारी है...

    सच कहा ..

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  6. bahut hi achcha lekh. charcha se nahi thos kadam uthane se hi sthitiyon me sudhar sambhav hoga.

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