Thursday, 15 March 2012

अबोला वादा



बहुत साल पहले ,एक ढलती हुई शाम में
मेरे हाथों को थाम कर अपने हाथों में ,
अपनी अमृत छलकाती हुई आँखों से
मेरी शर्माती हुई आँखों में झांकते हुए 
तुम ने नहीं कहा ,के तोड़ लाओगे 
सितारे मेरे लिए .........
तुम ने नहीं खाईं कसमें सात जन्मों की 
बस आँखों ही आँखों में किया था एक 
बिना शब्दों का अबोला वादा, के
मेरी हर सांस को  तुम महकाओगे 
खुशियों की अनोखी महक से ......


उस के बाद, हम ने ना जाने कितने 
पतझड़ ,सावन ,बसंत, बहार के 
मौसम देखे ,आंधी और तूफानों
ख़ुशी और गम को जीया है साथ -२

पर मुझे तुम्हारी आँखों में हमेशा अडिग 
नज़र आता रहा है वो अबोला वादा 
तुम ने अपनी हर सांस में जीया है 
और   निभाया   है  उस  वादे  को 
जो तुम ने कभी कहा ही नहीं .....
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अवन्ती सिंह





  

Saturday, 10 March 2012

तस्वीरों में खुशियाँ

खुशियों के पल इंसान के जीवन में कम ही आते है 
ये बहुत बार सुना था ,इसलिए जब भी खुशियाँ मिली 
उनकी तस्वीर बना कर रख दी मैं ने .......
के जब ना रहेगी ये खुशियाँ तो इन की देख कर तस्वीरें 
दिल को कुछ पल सुकून मिल जायेगा .....
खुशियाँ आती गयी ,जाती गयी,मैं तस्वीरें बनती गयी....
पर एक दिन जब निकाल कर देखा उन सब तस्वीरों को 
तो मैं हैरान रह गयी ,मेरी आँखे तो उन तस्वीरों को देख 
कर इस कद्र बहने लगी जैसे किसी पुराने  बाँध में दरार 
पड़ गयी हो ,  मैं कितनी नादाँ हूँ,   गयी   हुई     खुशियाँ, 
 तस्वीर      में कहाँ    बांध   कर    रखी   जा सकती है ,
वो तो और गहरा कर देती है ,उन खुशियों के गुज़र जाने 
के अहसास को........



(अवन्ती सिंह )   

Tuesday, 6 March 2012

आओ होली आई है!



सखियों ने भेजा सन्देश 
आओ   होली   आई  है!
 
खिले है  पलाश   चटकीले 
टेसू की कली मुस्काई है!


रंग  लिए है  पक्के  वाले 
पिचकारी     मंगवाई  है !


आकर हम संग  खेलो होरी 
ऋतू फागुन  की    आई है !


नहीं   चलेगा   कोई    बहाना 
पिया को संग में लेकर आना 


आकर  गले  लगाना   हम को 
हम संग हँसना और बतियाना !

गाकर गीत होली के "रसिया"
तुम महफ़िल की शान बढ़ाना!  


करेगे    गाल   तुम्हारे   लाल 
देखना  सखी  हमारा कमाल !


कब से तकते  राह   तुम्हारी
क्यूँ तुमने   देर    लगाई  है  !


सखियों  ने  भेजा   सन्देश 
आओ    होली      आई  है! 

(अवन्ती सिंह)



  

Thursday, 1 March 2012

आशा


मैं एक आशा हूँ 
मेरे टूट जाने का तो सवाल ही नहीं होता 
मैं बनी रहती हूँ हर एक मन में 
ताकि हर मन जीवित रह सके 

मुझे खुद को बचाए ही रखना है हर हाल में 
यदि मेरा अस्तित्व मिटा, तो मुश्किल हो जायेगा  
किसी के भी अस्तित्व का कायम रहना 

यदि मेरा कोई एक रूप टूट भी गया बिखर भी गया 
तो झट से एक नए कलेवर को धारण करके 
मैं पुनः मन में प्रकट हो जाउंगी 
मैं रहूँगी, सदा रहूँगी..... 

Saturday, 25 February 2012

गौ रक्षा सिर्फ हिन्दुओं की जिम्मेदारी नहीं ये सभी भारतियों की जिम्मेदारी है ,गौ हमारी माँ होने के साथ ही हमारे पर्यावरण के लिए ,लोगों के स्वास्थ से लिए भी बहुत महत्व रखती है ,खेती में भी उस के गोबर का और मूत्र का बहुत ज्यादा महत्व है,क्या आप इस विषय से खुद को जुदा पाते है या जोड़ना चाहते है ??गौ सेवा  रक्षा मंच पर राजेंद्र जी की एक पोस्ट पढ़ी (केंद्र सरकार ने बारहवें पंचवर्षीय योजना के तहत गौमाता के मांस के निर्यात में लगे प्रतिबंध को हटाने, नए और आधुनिक कतलखाने स्थापित करने , गोवंश के मांस के खुले एक्सपोर्ट की अनुमति लेने, भारत को मांस निर्यात में विश्व का सबसे बड़ा देश बनाने का घटिय और नीच षड़यंत्र रचा गया है) क्या अभी भी वो वक्त नहीं आया है के हमे इस विषय पर एक होकर गम्भीरता से विचार करना चाहिए ,क्या फेसबुक और ब्लॉग पर हम कुछ लुभावनी कवितायेँ ही लिख और पढ़कर सकते है , या इस विषय में लिखे गए लेख की तारीफ़ भर कर देना ही काफी है ,हम ये क्यूँ नहीं कह पाते के हम साथ है इस विषय में और जमीनी स्तर पर कुछ करना चाहते है, कुछ भी करने की सामर्थ क्या हम में नहीं?खुद के कर्तव्य से नज़रें चुराते रहेगे ,आखिर कब तक ??

Wednesday, 22 February 2012

कभी कोई कविता



कभी  कोई  कविता  जन्म  लेने  को  कितना  अकुलाति है!
कभी कोई कविता, सोच की गलियों  मे    ही  खो  जाती है!!


कभी कोई कविता,विचारों की  तेज  धार संग बह आती  है!
कभी कोई कविता जीवन का  सार, सम्पुर्ण  कह  जाती  है!!


कभी  कोई  चपला कविता,  देखो   तो  कैसे  इठलाती है!
कभी कोई मुस्काती कविता,मधुर फ़साने  कह  जाती  है!!


कभी  कोई  विरहनी  कविता, अश्क   आँख  मे  दे  जाती है!
कभी कोई प्रिया सी कविता, ह्रदय को झंकृत   कर जाती है!!


कभी कोई अति वाचक कविता,जाने क्या क्या  कह   जाती है!
कोई  शांत   मौनी   सी   कविता,  यूँ   ही  चुप से रह जाती है!!


कभी   कोई   घर-भेदी  कविता,  भेद  सभी  से  कह  जाती  है!
कभी कोई अति ज्ञानी कविता, ज्ञान  बघार  कर रह  जाती है!!


कभी कोई सोती सी कविता,कुछ कहते  कहते  सो  जाती  है!
चुगलखोर  सी  कविता  कोई, चुगली  कान   मे पो  जाती  है!!


कभी  कोई  मेघा  सी  कविता,  रिमझिम   बूंदे   बरसाती  है!
ज्वालामुखी    सी कविता  कोई,  लावे  को  फैला    जाती  है!!


कभी कोई मोटी सी कविता,सम्पुर्ण पृष्ठ ही  खा  जाती है!
और  कोई  नन्ही  सी  कविता  कोने  मे  ही  आ  जाती है!!


कविताओं  के  रूप है  कितने  ये  अब   तक मालूम नहीं!
हर कविता नव जीवन लेकर, नई  कहानी  कह जाती  है!!



(अवन्ती सिंह)

Saturday, 18 February 2012

पता नहीं

एक गीत लिखने का मन है 
ढूँढ़ रही हूँ कुछ नए शब्द
जो बिलकुल अनछुए हो 
न कभी पढ़े ,ना कभी सुने हों 
मन की असीम गहराई में जा कर 
बहुत कोशिश की मोतियों से शब्द पाने की
पर नाकाम रही ,मन की असीम गहराई में 
उतरने के बाद जो संगीत सुना ,वो बिलकुल नया 
और अनसुना था,पर उन शब्दों  को कागज़ पर किस तरह 
उकेरा जायेगा ,ये बोध अभी नहीं हुआ है ,जाने कब सीख
पाऊँगी उन शब्दों को लिख पाना ,और कब बनेगा  नए शब्दों 
से सजा नया गीत,कुछ दिनों में,कुछ साल में या किसी नए जन्म 
तक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी पता नहीं ................

(अवन्ती सिंह)