Tuesday, 23 August 2016
गीत अंतरात्मा के: आशा
गीत अंतरात्मा के: आशा: मैं एक आशा हूँ मेरे टूट जाने का तो सवाल ही नहीं होता मैं बनी रहती हूँ हर एक मन में ताकि हर मन जीवित रह सके मुझे खुद को बचाए ही रखन...
Friday, 31 July 2015
गुरु पूर्णिमा
आज गुरु पूर्णिमा है ! अपने गुरु के प्रति आभार प्रकट करने का दिवस ,गुरु शब्द का अर्थ होता है अँधेरे से प्रकाश की और ले जाने वाला ,अज्ञान ज्ञान की और ले जाने वाला ! मुंशी रूप में जन्म लेने के बाद हमे अनेक गुरु मिलते है सबसे पहले मान के रूप में फिर पिता के रूप में ,बहन भाई ,मित्र ,टीचर के रूप में दादा दादी के रूप में ,
आध्यात्मिक ज्ञान देने वाले गुरु के रूप में और सब से बड़ा गुरु परमपिता परमात्मा जो इन सभी के भीतर विराजित होकर इनके द्वारा हमे प्रकाश की और ले चलता है !
अपने बच्चों को इस दिन का ज्ञान दें उसे बताएं पहली गुरु माँ है ,फिर घर के बुजुर्ग है ,उससे कहें सबके चरण स्पर्श करके उनका धन्याद करे के आप ने मुझे काफी कुछ सिखाया उसके लिए शुक्रिया ,यदि चाहें तो कुछ उपहार भी दिलवायें ,टीचर के प्रति आभर व्यक्त करने को कहें ,स्कुल टीचर हो , या घर में आकर पढने वाला टीचर , बच्चा सब को बधाई दे अपने तरीके से अपने शब्दों में !
फिर सब से बड़े परमपिता परमेश्वर को भी शुक्रिया कहे ,उनके चरणों में कुछ पुष्प भी रखें तो उत्तम नहीं तो बस प्रणाम कर लें !
हर दिवस और हर त्यौहार का मुख्य उद्देश्य होता है इंसान में इंसान ,प्रकृति और परमात्मा के प्रति प्रेम और आभार के भाव को बढ़ाना ,ये भाव ही अच्छा इंसान बनाने सहायक होते है !
Tuesday, 5 May 2015
सेल्फ रियलाइजेशन (आत्म जान )
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इस शब्द (आत्म- ज्ञान )में ही हमारी पहचान छुपी है !
प्रश्न :- पर आत्मा को ये की क्या जरूरत के वो आत्मा है ?
उत्तर :- जरूरत है, क्युकी आत्मा स्वयं को शरीर जान कर जिस प्रकार के कार्य करती है वे कार्य काम ,क्रोध। लोभ मोह से प्रेरित किये कार्य हो जाते है ,जिसके कारण अनेक प्रकार की गलतियां अनजाने या जानते हुए हो जाती है ,यदि आत्मा स्वयं के ज्ञान के बाद इस देह के सब सम्भन्धों को निबहेँ तो वो ,सही और उत्तम कार्य करेगी !
प्रश्न :- उदाहरण से समझाइये कैसे ?
उत्तर :- जब आत्म ज्ञान हो के मैं आत्मा हूँ ,शरीर में रहकर अपना धर्म और वक़्त पूरा करके इस देह को छोड़कर ,अगली देह में जाना है और इस देह में रहते हुए जो कर्म करने है उस के ही आधार पर मेरे पुण्य और पाप संचित होगें वो ही मेरे लिए अगली देह कैसी हो इस बात का निर्धारण करेंगे ! यदि इतनी सी बात देहधारी समझ ले तो क्या वो कोई दुष्कर्म ,पाप /अनैतिक कर्म करेगा ? कभी नहीं करेगा ,ये तो छोटा सा उदाहरण है ,सेल्फ रियलाइजेशन से खुद को निरन्तर जोड़े रहने से इंसान में इतने अधिक परिवर्तन आते है के वो खुदब-खुद ,सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ता जाता है ,उसके लिए तरक्की और उन्नति की राहें खुलती जाती है जिसके फलस्वरूप वो अपना ये जन्म और अगले सब ही जन्म बहुत अच्छे तरीके से जीता है !
प्रश्न :- ये सब तो ठीक है पर जब हम खुद को आत्मा कहते है तो महसूस क्यों नहीं होता के हम आत्मा है ,सेल्फ रियलाइजेशन की सही विधि क्या है ?
उत्तर :- सतयुग में आत्म ज्ञान भरपूर था,इसलिए मनुष्य अपराध नहीं करता था ,धीरे धीरे पञ्चविकारों में फँसकर मनुष्य स्वयं को देह समझ कर कर्म करने लगा और ये ही कारण रहा के पाप और दुष्कर्म निरन्तर बढ़ते रहे ,इतने जन्मों का अभ्यास हो गया है न खुद को देह मानने का ,सब्र से धीरे धीरे ही ये अभ्यास छूटेगा !
इसके लिए नियम जरूरी है ,कोई भी एक वक़्त निश्चित करें , ऑफिस के लिए जाते वक़्त यदि बस या टेक्सी /मेट्रो इत्यादि काप्रयोग करते है तो ये वक़्त अच्छा है ,या जब भी दिन में पांच मिनट निकल पाएँ ,या रात को सोने से पहले ५ मिनट आँखें बंद कीजिये और दोहराये
मैं आत्मा हूँ !
मैं देह नहीं ,देहधारी हूँ !
मस्तिष्क के बीच ,चमकते सितारे की तरह में स्वरूप है !
मैं शांत हूँ !
मैं पवित्र हूँ !
मैं परम -आत्मा का अंश हूँ !
मैं सदा ऐसे कार्य करूंगा जिससे मेरा परम पिता मुझ पर गर्व कर सके !
और अंत में 5 बार दोहराये मैं शांत हूँ ,मैं शांत हूँ !
सब से जरूरी है किसी एक वक़्त का नियम बनाना ,वरना ये आप कभी नहीं कर पायेगे ,माया करने ही नहीं देगी !
Tuesday, 21 April 2015
हम आत्मा है ये मानने या जानने से क्या लाभ
ये मानने से हमारा पूरा जीवन बदल जाता है ,हमारा नज़रिया और मनुष्यों के लिए और जीवन के प्रति भी बदल जाता है ,हम खुश रहते है और ख़ुशी बाटते है ,हम अपने जीवन में शांति और ख़ुशी दो चीजे ही तो चाहते है और इस के लिए उम्र भर जद्दोजहद करते है पर सही राह नहीं चुनते और कुछ हाथ नहीं लगता ,पहले खुद को जाने समझे फिर जीवन को जीये !
कुछ सौ साल पहले हमारी शिक्षा की शुरुआत ही इस बात से की जाती थी की हम आत्मा है और इस पञ्च -भूत के शरीर में हमारा आना ,जीवन को जीना और शरीर की उम्र पूरी होने पर इसे त्याग नए शरीर की तरफ प्रस्थान करना ये सब ईश्वर द्वारा रचे इस सृष्टि मंच / रंग -मंच का एक कभी न रुकने वाला नाटक है ,हमे जो रोल मिला है जिस शरीर में जिस हालत में ,उसे पूरी ईमानदारी से सब का ध्यान रखते हुए जीना ,ये ही हमारा धर्म है ! धर्म की ये बड़ी ही सहज और सरल परिभाषा थी जो की समय के साथ बदलते हुए काफी विकृत हो चुकी है !
आत्मा क्या है ?
++++++++++
आत्मा एक ऊर्जा पुंज है ,सकारात्मक ऊर्जा पुंज ( पॉजिटिव एनर्जी )
ये ऊर्जा पुंज एक असीमित और अनन्त ऊर्जा पुंज का अंश है अर्थात परम +आत्मा का अंश !
परमआत्मा हमारा निर्माता /रचेता /परम पिता है हम उसे अनेक नामों से पुकारते है !
परमात्मा की शक्ति असीमित है अनन्त है पर हमारी शक्ति सीमित है ,हमे खुद को रिचार्ज करते रहने की जरूरत होती है जैसे मोबाईल वगैरह को चार्ज किया जाता है ,हम चार्ज होते है पॉजिटिव एनर्जी से !
यदि हमे अपने आस पास के लोगों से पॉजिटिव एनर्जी मिलती रहे तो हम खुश ,सुखी और शांत रहते है !
सृष्टि चक्र के आरम्भ में जब सतयुग और त्रेता युग थे तब पॉजिटिव एनर्जी की कमी नहीं थी ,जब तक ये ज्ञान भी था के हम आत्मा है ,जैसे जैसे ये ज्ञान लुप्त होता गया हम देह -अभिमानी होते गए ,पंच -विकारों में फसते गए और दुःख और अशांति के शिकार बनते गए भौतिक पदार्थों में सुख तलाशने लगे ,अगर उन में सुख शांति होते तो कलयुग में जितने भौतिक सुख है उतने किसी युग में नहीं होते पर मानव इस युग में ही सब से ज्यादा दुखी क्यूँ है ?
भौतिक वस्तुएँ सुविधा तो दे सकती है सुख नहीं दे सकती ! शांति तो कभी नहीं दे सकती ! फिर सुख शांति हम कहाँ तलाशे ? उसके लिए अपने मूल में वापस जाना होगा ,हम परम आत्मा का अंश है आत्मा है पॉजिटिव एनर्जी है उसी से हम बने है उसी से हम चार्ज होते है हमारी शक्तियाँ उसी से बढ़ती है और सुख शांति भी हमे वहीं से मिलेगा !
क्या करें
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जैसे हम आत्मा है वैसे ही अन्य सब को भी आत्मा जाने ,जिसे भी देखे याद करें ये भी आत्मा है मैं भी, हम एक परमात्मा का अंश है कोई छोटा नहीं बड़ा नहीं ,जब उसे अपना जानेंगे तो उसके लिए प्रेम और स्नेह के भाव मन में आयेगे ,पति पत्नी ,माँ बच्चे ,बहन भाई के लिए प्रेम आता है न ? जब वो भी हमारे है एक अंश है तो प्रेम /स्नेह मन में आएगा ही ,ये प्रेम /स्नेह /दया /करुणा ये पॉजिटिव एनर्जी का काफी निर्माण करते है ,जैसे ही हम दूसरों के लिए पॉजिटिव सोचना शुरू करते है हमारी चार्जिंग भी साथ साथ शुरू हो जाती है ,किसी से स्नेह करें ,करुणा वश या दया से कुछ काम करें तो पहले ख़ुशी हम पते है और सामने वाला बाद में ख़ुशी पाता है ऐसा होता है न?
तरीका हमे मिल गया ,पॉजिटिव रहें ,खुशियाँ बाँटें ,मुस्कान बाटें ,औरों की कमियों को नहीं खूबियों को देखें और खूब खूब पॉजिटिव एनर्जी औरों को दें साथ ही खुद भी पाएं !
आसपास के लोग बुरे है गलत है हमारी गलती निकलते है ,कमियां देखते है तब क्या करें और कहना आसान ऐ पॉजिटिव रहो पर अधिक देर रह ही नहीं पते तो क्या करें ? ये सब अगली पोस्ट में बात करेंगे !
इतना सब लिखा मेरा हौसला बढ़ाने के लिए क्या कुछ पॉजिटिव किया जा सकता है सोचियेगा :) सोचना क्या है पोस्ट शेयर करें ,अपनी राय दें ,सुझाव दें
Monday, 16 March 2015
हमारे अन्नदाता की खराब हालत के कुछ जिम्मेदार हम भी है ?
हमारा जीवन किसानों के साथ परोक्ष रूप से ही नहीं प्रत्यक्ष में भी जुडा हुआ है ,हमारी रसोई में अन्न ,सब्जी फल पहुचता किसी भी माध्यम से हो किन्तु उसे जीवन देने वाला तो किसान ही है यदि किसान न हो तो हम कहाँ से लायेगे ये सब ? पर हम लोग क्या अपने अन्नदाता किसान के बारे में जरा भी सवेदन शील है? आज का किसान कितना परेशान है क्या आप ये जानते है ? आइये पहले ये ही समझ लें
किसान , अन्नदाता भी कहा जाता है उसकी हालत और इज्जत ५० और ६० के दशक में आज से बहुत बेहतर थी ,आज़ादी की लड़ाई में भी सब से अधिक आर्थिक योगदान भी किसानों का ही था ! आज़ादी के बाद सब के हालत सुधरे किन्तु किसान को तो मानो हाशिये पर ही धकेल दिया गया ! किसान जो फसल अपने खून पसीने से सींचता है उस का मूल्य वो स्वयं निर्धारित नहीं कर सकता ! उसे जो मूल्य मिलता है उसे से उसकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो चुकी है के अगली फसल के लिए उसकी जेब में पैसे ही नहीं होते और उसे क़र्ज़ लेना पड़ता है ! उसके लिए निर्धारित यूरिया / खाद / कीटनाशक जिन पर सब्सिटी मिलती है उस तक न पहुँच कर बाजार में ब्लैक में बेच दिया जाता है और किसान उसका दोगुना मूल्य चूका कर अपने खेतों में डालता है ,महंगे दाम पर बीज मिलते है ,जैसे तैसे बेचारा किसान अपनी फसल को बोता है और जब उसे लगता है अब कुछ ही दिनों में फसल पकने वाली है तो अक्सर बेमौसम बरसात /आंधी /तूफान /बाढ़ /और सूखे के कारण वो कभी आधी तो कभी पूरी फसल खो देता है ! सरकार की तरफ से घोषित सहायता राशि उस तक पहुंच ही नहीं पाती ! वो असहाय है कुछ कर नहीं पाता , पर हम लोग लोग तो इतने असहाय नहीं है ,जिसके हाथ का अन्न खाकर जीवित है ,उसकी मुसीबत में हम उस के कभी काम आए है ? हम लोगों के पास माध्यम है सोशल मिडिया यदि हम लोग चाहें तो किसी भी मुद्दे को इतना उठा सकते है के सरकार मजबूर हो जाती है उस मुद्दे पर काम करने के लिए ! हम कितना सोचते है इस विषय पर कितना लिखते है ? क्या ऐसा नहीं हो सकता के इस विषय पर हम सब साथ मिलकर लिखें? कोई ब्लॉग या कोई पेज़ ऐसा बनाएं जिस पर गंभीरता से लिखा जाएँ और ऐसे लिखा जाये के सोई सरक़ार की आँखें खुल जाएँ ,किसानों से उनकी मर्ज़ी के बिना ज़मीन लेना ये विषय भी उठाना चाहिए ,विकास इतना भी नहीं हो जाना चाहिए के खेती की ज़मीन खत्म हो जाएँ और हम और देशों से अनाज माँगा कर खाएं,प्लीज़ इस पर गंभीरता से सोचें
Monday, 2 March 2015
कर्पूर या कपूर
हम भारतीय इस नाम से भली भांति परिचित है ,पूजा में कपूर का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान होता है
इसे कई तरह की दवाइयों में ,बाम इत्यादि में भी काफी इस्तेमाल किया जाता है!
ये जीवाणुओं का नाश करने में काफी कारगर होता है ,जुकाम या वायरल जो की हवा या छींकने -खाँसने से फैलते है उन्हें समाप्त करने में इसकी सहायता ली जा सकती है ! आज कल फैल रहे स्वाइन फ्लू में भी इसका उपयोग काफी हद तक उपयोगी है काफी लोग कर्पूर की छोटी से पोटली बनाकर साथ रखते है और भीड़भाड़ वाले इलाके में इसे सूंघते रहते है ,यदि कीटाणु हमारी साँसों तक पहुंच भी जाता है तो इसकी गंघ उसे मार डालती है ,बच्चों के स्कुल बैग पर भी मलमल के कपड़े की पोटली बनाकर उसमे कुछ टुकड़े कर्पूर रख दें,जिससे के उसके आस-पास इसकी गन्ध फैलती रहे ,ऑफिस जाने वाले लोग भी अपने साथ ये छोटी से पोटली लेकर जाये अपनी मेज़ पर या आस पास किसी भी स्थान पर रख दे , अपने घर के दरवाजे पर भी ऐसी पोटली बंधने से घर में कीटाणु का प्रवेश कम होगा !
मच्छर नाशक
मच्छर को भगाने में भी इसका उपयोग काफी सहायक होता है ,गर्म पानी में इसकी एक या २ टिकिया हर एक घंटे में डालते रहे मच्छर काफी कम आयेगे एयर इसकी महक नुकसान भी नहीं करेगी !
अधिक मात्रा में कर्पूर सूंघने से नींद या हलकी बेहोशी भी आ सकती है इसलिए इसका इस्तेमाल सावधानी से करें ! पूजा का कपूर या देशी कपूर ही सूंघने में इस्तेमाल करें कपड़ों में रखने वाला कपूर न सूंघे उसे घर में रखा जा सकता है
हम भारतीय इस नाम से भली भांति परिचित है ,पूजा में कपूर का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान होता है
इसे कई तरह की दवाइयों में ,बाम इत्यादि में भी काफी इस्तेमाल किया जाता है!
ये जीवाणुओं का नाश करने में काफी कारगर होता है ,जुकाम या वायरल जो की हवा या छींकने -खाँसने से फैलते है उन्हें समाप्त करने में इसकी सहायता ली जा सकती है ! आज कल फैल रहे स्वाइन फ्लू में भी इसका उपयोग काफी हद तक उपयोगी है काफी लोग कर्पूर की छोटी से पोटली बनाकर साथ रखते है और भीड़भाड़ वाले इलाके में इसे सूंघते रहते है ,यदि कीटाणु हमारी साँसों तक पहुंच भी जाता है तो इसकी गंघ उसे मार डालती है ,बच्चों के स्कुल बैग पर भी मलमल के कपड़े की पोटली बनाकर उसमे कुछ टुकड़े कर्पूर रख दें,जिससे के उसके आस-पास इसकी गन्ध फैलती रहे ,ऑफिस जाने वाले लोग भी अपने साथ ये छोटी से पोटली लेकर जाये अपनी मेज़ पर या आस पास किसी भी स्थान पर रख दे , अपने घर के दरवाजे पर भी ऐसी पोटली बंधने से घर में कीटाणु का प्रवेश कम होगा !
मच्छर नाशक
मच्छर को भगाने में भी इसका उपयोग काफी सहायक होता है ,गर्म पानी में इसकी एक या २ टिकिया हर एक घंटे में डालते रहे मच्छर काफी कम आयेगे एयर इसकी महक नुकसान भी नहीं करेगी !
अधिक मात्रा में कर्पूर सूंघने से नींद या हलकी बेहोशी भी आ सकती है इसलिए इसका इस्तेमाल सावधानी से करें ! पूजा का कपूर या देशी कपूर ही सूंघने में इस्तेमाल करें कपड़ों में रखने वाला कपूर न सूंघे उसे घर में रखा जा सकता है
Friday, 27 February 2015
बचाव ही सावधानी है !
समाज में सोये हुए लोगों की भीड़ कुछ बढ़ सी गयी है !१००० लोगों का स्वाइन फ्लू से मर जाना इसका एक प्रमाण है ,थोड़ी सी जागरूकता इन लोगों को बचा सकती थी ,सोचिये यदि इन के चेहरे पर मास्क लगा होता,घर आकर ठीक से हाथ मुह धोये होते तो किसी बहन का भाई किसी माँ का बेटा आज उसके साथ होता,क्या हम भी इस गुनाह के भागीदार है ? क्या हम ने अपना योगदान दिया जागरूकता फ़ैलाने में ? यदि नहीं तो अभी भी इस कार्य को किया जा सकता है,ये खबरे टीवी चैनल अब काम दिखा रहें है ,पर जितनी भी खबरें इस विषय में आ रही है उससे ये ही समझ आ रहा है के बीमारी लगातार बढ़ती जा रही है ,हम लोगों की उदासीनता का ये असर न हो के गुजरात की तरह पुरे भारत में धारा 144 लगानी पड़े सरकार को ! इसे एक अभियान की तरह लें, कमर कस लीजिये जागरूकता लाने में! सावधानी
Thursday, 26 February 2015
भारत का राष्ट्रीय वृक्ष
भारत का राष्ट्रीय वृक्ष बरगद है ! बरगद को अक्षय वृक्ष भी कहा जाता है ,बरगद में एन्टीऑक्सीडेंट काफी पाये जाते है इस ही कारण वृद्धावस्था के कई रोगों में इसका उपयोग किया जाता है ,इस की कोमल जतए पीस कर चेहरे पर लगाने से झुर्रियां समाप्त होती है ,मूत्र विकार,दांतों का हिलना ,दर्द इत्यादि में इसका खूब इस्तेमाल होता है ,किसी भी प्रकार के घाव को भरने के लिए इसके पत्तों को गर्म करके बंधने से लाभ होता है इसकी पत्तीओं को सुख कर चूर्ण बना ले और शहद के साथ नित्य प्रति सेवन से याददाश्त बढ़ती है ,नित्य प्रति,इस पर जल चढ़ाने से हमारे अनेक संकट दूर होते है ,घर के आस पास या मंदिर में ,पार्क में इस वृक्ष अवश्य लगाएं, तथा औरों को भी प्रेरित करें !
Monday, 23 February 2015
कुछ शेर
कुमार विश्वास की कलम से निकले चंद शेर मुझे बहुत पसंद है ,आप भी इनका लुत्फ़ उठायें
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तुम्हे जीने में आसानी बहुत है
तुम्हारे खून में पानी बहुत है !
जहर,सूली ने,गाली ,गोलियों ने
हमारी ज़ात पहचानी बहुत है
इरादा कर लिया गर खुदखुशी का
तो अपनी आँख का पानी बहुत है
=======================
पुकारे आँख में चढ़कर, तो खु को खु समझता है
अँधेरा किस को कहते है ये बस जुगनू समझता है
हमे तो चाँद -तारों में भी तेरा रूप दिखता है
मोहब्ब्त में नुमाइश को अदाये तू समझता है !
=================================
रूह -जिस्म का ठौर -ठिकाना चलता रहताहै
जीना मारना, खोना पाना चलता रहता है !
सुख दुःख वाली चादर ,बढ़ती घटती रहती है
मौला तेरा ताना बाना चलता रहता है !
इश्क करो तो जीते जी मर जाना पड़ता है
मर कर भी लेकिन जुर्माना चलता रहता है
जिन नज़रों ने रोग लगाया गज़लें कहने का
आज तलक उन को नज़राना चलता रहता है !
(कुमार विश्वास )
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तुम्हे जीने में आसानी बहुत है
तुम्हारे खून में पानी बहुत है !
जहर,सूली ने,गाली ,गोलियों ने
हमारी ज़ात पहचानी बहुत है
इरादा कर लिया गर खुदखुशी का
तो अपनी आँख का पानी बहुत है
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पुकारे आँख में चढ़कर, तो खु को खु समझता है
अँधेरा किस को कहते है ये बस जुगनू समझता है
हमे तो चाँद -तारों में भी तेरा रूप दिखता है
मोहब्ब्त में नुमाइश को अदाये तू समझता है !
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रूह -जिस्म का ठौर -ठिकाना चलता रहताहै
जीना मारना, खोना पाना चलता रहता है !
सुख दुःख वाली चादर ,बढ़ती घटती रहती है
मौला तेरा ताना बाना चलता रहता है !
इश्क करो तो जीते जी मर जाना पड़ता है
मर कर भी लेकिन जुर्माना चलता रहता है
जिन नज़रों ने रोग लगाया गज़लें कहने का
आज तलक उन को नज़राना चलता रहता है !
(कुमार विश्वास )
Wednesday, 18 February 2015
स्वाइन फ्लू
जाग जाइये ! क्युकि सरकारे सो रही है !
स्वाइन फ्लू
इस बीमारी ने देश के कई राज्योँ में अपना आतंक फैलाया हुआ है , बिना जागरूकता के ये बीमारी महामारी का रूप ले चुकी है ! चुनाव में पानी की तरह पैसे बहाने वाली सरकारे ,लोगों को बीमारी से बचने के बारे में कोई भी जानकारी या प्रचार बिलकुल ध्यान नहीं दे रही हैलक्षण
यदि किसी व्यक्ति को सर्दी-खांसी है और उसके साथ उसे सांस लेने में भी तकलीफ हो रही है या 101 डिग्री से ज़्यादा का बुखार है तो इसे बिलकुल नज़रंदाज नहीं करना चाहिए। क्योंकि ये लक्षण स्वाइन फ़्लू के हो सकते हैं।
हर बार सर्दी-खांसी स्वाइन फ़्लू का संकेत नहीं देती, फिर भी सर्दी-खांसी होने पर अतिरिक्त सावधानी रखना बेहद ज़रूरी है। क्योंकि उसके साथ यदि सांस लेने में तकलीफ होने लगे या तेज़ बुखार आ जाए तो तुरंत किसी अस्पताल में जाकर जांच कराना चाहिए, क्योंकि ज़्यादातर मामलों में ऐसी स्थिति स्वाइन फ़्लू का संकेत देती है और इसका का इलाज जितनी जल्दी शुरू किया जाए इससे बचने की संभावनाएं उतनी ज़्यादा बढ़ जाती हैं। ऐसी स्थिति में आराम करने के साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, ताकि डी-हाइड्रेशन ना हो। वर्ना मर्ज बढ़ सकता है।
सावधानी
अनुभव के आधार पर कहा जा सकता है के मेट्रो में यात्रा के दौरान ,बीमारी एक से लग जाने का खतरा काफी है,मेट्रो में काफी भीड़ के कारण लोग काफी आस पास खड़े होते है ,मैट्रो का दरवाजा बंद होता है ताज़ी हवा आने का कोई माध्यम नहीं रहता सब उस ही हवा में सांस ले रहे होते है ,अपने मुह पर मास्क जरूर लगाये और वापस अपने स्थान पर पहुंच कर अच्छे से मुह-हाथ साफ़ करें !
(1) इस बीमारी से बचने के लिए हाइजीन का खासतौर पर ध्यान रखना चाहिए. खांसते समय और झींकते समय टीशू से कवर रखें. इसके बाद टीशू को नष्ट कर दें.
(2) बाहर से आकर हाथों को साबुन से अच्छे से धोएं और एल्कोहल बेस्ड सेनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
(3) जिन लोगों में स्वाइन फ्लू के लक्षण हों तो उन्हें मास्क पहनना चाहिए और घर में ही रहना चाहिए.
(4) स्वाइन फ्लू के लक्षण वाले मरीज से क्लोज कॉंटेक्ट से बचें. हाथ मिलाने से बचें. रेग्यूलर ब्रेक पर हाथ धोते रहें.
(5) जिन लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही हो और तीन-चार दिन से हाई फीवर हो, उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए.
(6) स्वाइन फ्लू के टेस्ट के लिए गले और नाक के द्रव्यों का टेस्ट होता है जिससे एच1एन1 वायरस की पहचान की जाती है. ऐसा कोई भी टेस्ट डॉक्टर की सलाह के बाद ही करवाएं.
स्वाइन फ्लू ,या अन्य किसी प्रकार के फ्लू के लिए ये काढ़ा सहायक औषधि के रूप में काफी कारगर है
एक टुकड़ा दालचीनी
एक इलायची
३,४, लौंग
जरा सी मुलेठी
एक छोटा टुकड़ा अदरक
कुछ दाने काली मिर्च
तुलसी के कुछ पत्ते
इन सब को आधा लीटर पानी में उबाले , एक चौथाई रह पर छान कर,गुनगुना ही पीये ,ये सब आप चाय में भी डाल सकते है ,अगर बीमारी अधिक बड़ गयी हो तो थोड़ी नीम की छाल और गिलोय भी डाल ले किन्तु नीम की छाल और गिलोय को चाय में नहीं सिर्फ काढ़े में डाला जा सकता है,दिन में २ बार इस काढ़े का उपयोग करें !
जो लोग बीमार नहीं है वे भी ये काढ़ा दिन में एक बार पीये तो बीमारी से बचे रहेंगे
नोट :- इस काढ़े में मुलेठी की मात्रा सबसे अधिक रखें ये काढ़े को आसानी से पचने लायक बनती है किन्तु जिन्हे डायबटीज हो वे मुलेठी नहीं डाले
( प्याज के ४ टुकड़े करके घर में अपने आस पास रखें और बीमार को सूंघने को दें,किसी भी प्रकार के वायरस को इससे नियंत्रित किया जा सकता है )
एक टुकड़ा दालचीनी
एक इलायची
३,४, लौंग
जरा सी मुलेठी
एक छोटा टुकड़ा अदरक
कुछ दाने काली मिर्च
तुलसी के कुछ पत्ते
इन सब को आधा लीटर पानी में उबाले , एक चौथाई रह पर छान कर,गुनगुना ही पीये ,ये सब आप चाय में भी डाल सकते है ,अगर बीमारी अधिक बड़ गयी हो तो थोड़ी नीम की छाल और गिलोय भी डाल ले किन्तु नीम की छाल और गिलोय को चाय में नहीं सिर्फ काढ़े में डाला जा सकता है,दिन में २ बार इस काढ़े का उपयोग करें !
जो लोग बीमार नहीं है वे भी ये काढ़ा दिन में एक बार पीये तो बीमारी से बचे रहेंगे
नोट :- इस काढ़े में मुलेठी की मात्रा सबसे अधिक रखें ये काढ़े को आसानी से पचने लायक बनती है किन्तु जिन्हे डायबटीज हो वे मुलेठी नहीं डाले
( प्याज के ४ टुकड़े करके घर में अपने आस पास रखें और बीमार को सूंघने को दें,किसी भी प्रकार के वायरस को इससे नियंत्रित किया जा सकता है )
कपूर को भी कीटाणुनाशक के रूप में आयुर्वेद में मान्यता प्राप्त है ,इसे किसी सूती कपड़े में रख कर सूंघे ,अपने घर में या जहाँ भी आप हों कुछ टुकड़े कपूर के अवश्य रखें व्,हवा में इसकी खुशब फैलने से कीटाणु खत्म होंगे
Sunday, 11 May 2014
पीपल का पेड़
पीपल का पेड़ रात को भी ऑक्सीजन प्रदान करता है ये हम सब जानते ही है , रात को जब अन्य पेड़ ऑक्सीजन लेने लगते है तो प्राणी मात्र के लिए ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम हो जाती है , शुद्ध ऑक्सीजन की कमी के कारण अनेक बीमारियाँ भी होती है , सुबह ३ से ५ बजे के बीच में होने वाले हार्ट-अटैक का एक मुख्य कारण ऑक्सीजन की कमी भी है पृथ्वी पर ऑक्सीजन की घटती मात्रा को संभालने के लिए क्या हम लोग जागरूक होकर पीपल के वृक्ष को अधिक से अधिक लगा सकते है? पार्क ,बगीचे या फिर बड़े गमलों में ही पीपल के कुछ वृक्ष लगायें और अपनी स्वच्छ साँसें खुद निर्मित करें, कृपया इस तरह के मैसेज अपनी वॉल पर अपने शब्दोँ में जरूर लिखें ,लेखक मित्र इस विषय पर कविताएँ और रचनाएँ जरूर लिखे!
Monday, 27 January 2014
ख़त एक तुम को लिखने का मन है भगवन
क्या पता है तुम्हारा? किस धाम लिखूं ?
मन्दिर में हो?गिरिजा में हो? या मस्जिद में पैगाम लिखूं ?
तुम नाम भी अपना बतला दो ,राम लिखूं या रहमान लिखूं?
धरती, अम्बर सूरज लिख दूँ या सुबह लिखूं या शाम लिखूं ?
कह कर तुम को अल्लाह पुकारूँ या जगन्नाथ भगवान लिखूं
तुम महावीर हो या नानक हो तुम? पर हम सब के पालक हो तुम
निवास निर्धारित है क्या तुम्हारा? गीता में हो? या कुरान लिखूं?
किस देश में हो?किस वेश में हो? किस हाल में? परिवेश में हो ?
किसी पत्थर कि मूर्त में हो या काबे की सुरत में हो?या गुरुग्रंथ स्थान लिखूं?
तुम निराकार हो या साकार हो तुम ? एक हो या अनेक प्रकार हो तुम ?
रुक्मणी के महल में रहते हो? या मीरा का ग्राम स्थान लिखूं?
ख़त एक तुम को लिखने का मन है भगवन
क्या पता है तुम्हारा? किस धाम लिखूं ?..............
क्या पता है तुम्हारा? किस धाम लिखूं ?
मन्दिर में हो?गिरिजा में हो? या मस्जिद में पैगाम लिखूं ?
तुम नाम भी अपना बतला दो ,राम लिखूं या रहमान लिखूं?
धरती, अम्बर सूरज लिख दूँ या सुबह लिखूं या शाम लिखूं ?
कह कर तुम को अल्लाह पुकारूँ या जगन्नाथ भगवान लिखूं
तुम महावीर हो या नानक हो तुम? पर हम सब के पालक हो तुम
निवास निर्धारित है क्या तुम्हारा? गीता में हो? या कुरान लिखूं?
किस देश में हो?किस वेश में हो? किस हाल में? परिवेश में हो ?
किसी पत्थर कि मूर्त में हो या काबे की सुरत में हो?या गुरुग्रंथ स्थान लिखूं?
तुम निराकार हो या साकार हो तुम ? एक हो या अनेक प्रकार हो तुम ?
रुक्मणी के महल में रहते हो? या मीरा का ग्राम स्थान लिखूं?
ख़त एक तुम को लिखने का मन है भगवन
क्या पता है तुम्हारा? किस धाम लिखूं ?..............
Wednesday, 22 January 2014
सरकारी हॉस्पिटल्स
सरकारी हॉस्पिटल्स कि हालत तो खराब है ही वहाँ पर काम करने वाले लोगों के नखरे भी सातवें आसमान पर रहते है ,यहाँ तक तो इंसान झेल भी ले लेकिन मरीज़ के प्रति कि जा रही लापरवाही को कैसे नज़र अंदाज़ किया जाये समझ नहीं आता ,जीवन में ४, या ५ बार सरकारी हस्पताल में जाना हुआ है और हर बार दिल बहुत दुखा ,पिछले शुक्रवार कुत्ते ने कटा लिया अपने ड़ाक्टर के पास गए तो पता चला के इंजेक्शन १०००० रूपये का आता है बाहर मार्किट में ,उसके बाद लगने वाले ५ इंजेक्शन प्रति इंजेक्शन ५०० रूपये का आता है ,सलाह मिली के इंजेक्शन सरकारी अस्प्ताल में भी लगाये जाते है फ्री आफ कॉस्ट ,दीनदयाल अस्प्ताल पास है वहाँ लगवा आइये ,सलाह उचित लगी इंजेक्शन लगवा आये शनिवार को एक बजे के बाद इंजेक्शन नहीं लगते पर एमरजैंसी में पहुँचिये तो लगा देते है ,वहाँ का माहौल बहुत अच्छा नहीं तो बुरा भी कहना उचित नहीं होगा ,जैसे तैसे ४ घंटे में इंजेक्शन लगवा कर राहत कि सांस ली अगली तारीख मिली थी २१ ,सुबह १० बजे पहुचे ,भीड़ तो पूछिये मत,दरवाजा बंद था अंदर झांक कर देख रहे लोगों ने बताया चाय -नाश्ता चल रहा रहा भीड़ बढ़ती रही लोगो ने जब तंग करना शुरू किया तो अंदर बुलावा आने लगा ,मेरा नंबर आया ,सिस्टर ने पर्ची देखि और हाथ में इंजेक्शन उठा लिया लगाने को ,मेरी आखों में की सवाल देखर कहा ,हाथ आगे कीजिये सोचेने का वक़त नहीं है,मैं ने कहा आप ने इंजेक्शन पहले से भर के रखा है ,उसने कहा हाँ ,भीड़ ज्यादा इस लिए ऐसे करते है ,कई सारी सिरिंज भी निकाल कर रखीं थी ,मैं ने कहा सिस्टर नई सिरिंज तो मेरे सामने लगाइये प्लीज़ , इतना सुनना था वे भड़क उठी ,हम क्या बेईमान है सब सिरिंज नई है ,इतने नखरे है तो प्राइवेट में जाकर लगवाओ ,मैं ने कहा यहाँ के सब खर्चे जनता के दिए टैक्स से चलते है हमारा हक़ है चाहेगे तो यहाँ से ही लगवाएंगे ,आप सिरिंग बदलिए ,काफी बहस के बाद उन्होंने सिरिंज बदली ,और बिना तोड़े ही वो सिरिंज कूड़े-दान में फेक दी , कितने ही कानून बन जाये पर जब तक एक इंसान दूसरे इंसान कि जान को कीमती नहीं समझेगा ये घटनाये रुकने वाली है ?कभी नहीं .
क्या वे अपने परिवार के सदस्य के स्वास्थ्य से ऐसे खेल सकती थीं? कभी नहीं
Tuesday, 21 January 2014
सिर्फ चर्चा और बातें
चर्चा करें समाज में हो रहे परिवर्तन पर!
बढ़ रहे भ्रष्टाचार पर,आम के आचार पर
बदलती नीतियाँ और बदलते संस्कार पर!
रेल पर, खेल पर, महंगे होते तेल पर
कुश्ती के दंगल पर,खत्म होते जंगल पर !
बाघों के शिकार पर ,हिरणों की हत्या पर
करें खूब चर्चा , झूठ और सत्य पर !
सडक के किनारे ठिठुरते कुछ बच्चों पर
कभी बुरे लोगों पर और कभी अच्छों पर !
गीता के ज्ञान पर, धर्म और विज्ञान पर
वहशी और इंसान पर ,औरों के ईमान पर !
क्या इन चर्चाओं से कुछ बदल पायेगा
कुछ ठोस करने को कदम कब उठ पायेगा!
कुछ ठोस काम करने की सरकार की जिम्मेदारी है
हम करेगे चर्चा , हमे चर्चा की बीमारी है !
Wednesday, 16 October 2013
मोटापे से हैं परेशान?
मोटापा कम करने के हजारों उपाय आप ने पढ़े -सुने होंगें पर सब से सरल उपाय है ये जानना के मोटापा बढ़ता क्यों है,मेडिकल की भाषा में समझे तो आवश्यकता से अधिक कैलेरी लेने के कारण मोटापा बढने लगता है,जो व्यक्ति baithe रहते है अधिक काम नहीं karte और जिनकी aayu बढ़ गईहै उन्हें दिन मे१२०० से लेकर १५०० कैलेरी की आवश्कता होती है,अधिक भागदोड़ करने वालेलोगों को ,बच्चों को,नवयुवको को२००० से २५०० कैलेरी की आवश्यकता होती है ,आइये अब जानते है किस चीज में कितनी कैलेरी होती है
सामान्य आकार की रोटी = लगभग १०० कैलेरीएक कटोरी दाल/सब्जी = " १०० कैलेरी
एक कप चाय = " १०० कैलेरी
एक कप काफी = " २०० कैलेरी
एक कटोरी पनीर की या अधिक आयल में बनी कोई भी सब्जी = " ३०० से ५०० कैलेरी
एक कटोरी खीर = " ५०० से ६०० कैलेरी
एक समोसा /कचोरी = " २०० से २५० कैलेरी
सेब/ संतरा/ अमरुद/ सामान्य आकार का १०० कैलेरी
केला १५० से२०० कैलेरी
बीन्स फली की सब्जी एक कटोरी ६० कैलेरी
एक कटोरी (सामान्य आकार) चावल १०० से १५० कैलेरी
१०० ग्राम बिस्किट या नमकीन ४०० से ५०० कैलेरी
पूरी छोले की एक प्लेट ५०० से ६०० कैलेरी
हरा सलाद एक प्लेट १०० से १५० कैलेरी
इस प्रकार आप हिसाब लगा सकते है के आप ने दिन भर में कितनी कैलेरी खाई है अगर आप का वजन बढ़ गया है तो १२०० से१५०० तक कैलेरी खाइए हर महीने आप का वजन २ किलो तक कम हो जायेगा (खुद आजमाया हुआ नुस्खा ,निश्चिन्त रहें वजन जरुर कम होगा :) वजन कम हो तो बताइयेगा जरुर ) विशेष =सुबह शाम आधा घंटा सैर करने जरुर जाएँ
(अवन्ती सिंह )
Monday, 30 September 2013
मरुआ
गीत अंतरात्मा के:( मरुआ:) ये एक पौधा होता है जो तुलसी से काफी मिलता जुलता होता है इस में अनंत गुण होते है पर अभी सिर्फ इस के एक गुण के बारे में बात करते है,...
Friday, 8 March 2013
प्रकृति और नारी
मैं हवा सी हूँ
मुझे बाँध सके कोई
इतनी बिसात कहाँ है किसी में
बाँधने वाले को भी उड़ा कर ले जा सकती हूँ
किन्तु बंधी रहती हूँ सदा ,स्नेह की कच्ची डोरी से ....
मैं दहकती ज्वाला सी हूँ
मेरा सम्मान करने वाले मुझे से जीवन पाते है !
करें जो अपमान, वो भस्म हो जाते है
मेरे क्रोध की धधकती लपटों से .....
कल कल करते ,बहते नीर सी हूँ मैं ...
चाहु तो प्यास बुझा दूँ जग की
अपने स्नेह ,अपनी ममता से
चाहूँ तो ध्वस्त कर दूँ ,घर ,बस्ती ,सब
किसी क्रोधित,उफनती नदी की तरह ....
मैं धेर्य से टिकी धरा सी हूँ ...
तुम्हारे हर कर्म को व्यवहार को
चुपचाप सहती हूँ शांत रह कर
पर जब टूट जाये बाँध धेर्य का
तो मेरी जरा सी कसमसाहट
भूकंप ला सकती है,उथल -पुथल
कर सकती है तुम्हारे मन को ,जीवन को .....
अपनी विशालता में सब को समेटे
असीमित आकाश सी भी हूँ मैं
अपने स्नेह-जल को बरसा कर
सब का जीवन पोषित करूँ
नव-जीवन का संचार् करूँ
पर यदि बढ़े तुम्हारे मन का प्रदुषण
तो हो कुपित ,बिजलियाँ गिरा कर
दुष्टों का संघार करूँ ........
(अवन्ती सिंह आशा )
मुझे बाँध सके कोई
इतनी बिसात कहाँ है किसी में
बाँधने वाले को भी उड़ा कर ले जा सकती हूँ
किन्तु बंधी रहती हूँ सदा ,स्नेह की कच्ची डोरी से ....
मैं दहकती ज्वाला सी हूँ
मेरा सम्मान करने वाले मुझे से जीवन पाते है !
करें जो अपमान, वो भस्म हो जाते है
मेरे क्रोध की धधकती लपटों से .....
कल कल करते ,बहते नीर सी हूँ मैं ...
चाहु तो प्यास बुझा दूँ जग की
अपने स्नेह ,अपनी ममता से
चाहूँ तो ध्वस्त कर दूँ ,घर ,बस्ती ,सब
किसी क्रोधित,उफनती नदी की तरह ....
मैं धेर्य से टिकी धरा सी हूँ ...
तुम्हारे हर कर्म को व्यवहार को
चुपचाप सहती हूँ शांत रह कर
पर जब टूट जाये बाँध धेर्य का
तो मेरी जरा सी कसमसाहट
भूकंप ला सकती है,उथल -पुथल
कर सकती है तुम्हारे मन को ,जीवन को .....
अपनी विशालता में सब को समेटे
असीमित आकाश सी भी हूँ मैं
अपने स्नेह-जल को बरसा कर
सब का जीवन पोषित करूँ
नव-जीवन का संचार् करूँ
पर यदि बढ़े तुम्हारे मन का प्रदुषण
तो हो कुपित ,बिजलियाँ गिरा कर
दुष्टों का संघार करूँ ........
(अवन्ती सिंह आशा )
Thursday, 24 January 2013
सिर्फ चर्चा और बातें
चर्चा करें समाज में हो रहे परिवर्तन पर!
बढ़ रहे भ्रष्टाचार पर,आम के आचार पर
बदलती नीतियाँ और बदलते संस्कार पर!
रेल पर, खेल पर, महंगे होते तेल पर
कुश्ती के दंगल पर,खत्म होते जंगल पर !
बाघों के शिकार पर ,हिरणों की हत्या पर
करें खूब चर्चा , झूठ और सत्य पर !
सडक के किनारे ठिठुरते कुछ बच्चों पर
कभी बुरे लोगों पर और कभी अच्छों पर !
गीता के ज्ञान पर, धर्म और विज्ञान पर
वहशी और इंसान पर ,औरों के ईमान पर !
क्या इन चर्चाओं से कुछ बदल पायेगा
कुछ ठोस करने को कदम कब उठ पायेगा!
कुछ ठोस काम करने की सरकार की जिम्मेदारी है
हम करेगे चर्चा , हमे चर्चा की बीमारी है !
Wednesday, 9 January 2013
एक पुरानी रचना
भेड़ की खाल में कुछ भेड़िये भी बैठे है
लिबासे इंसान में कुछ जानवर भी बैठे है
शर्मो ह्या को बेच आये है जा के बाज़ार में
और कुटिल मुस्कान चेहरे पर सजा कर बैठे है
घर की बहन बेटियों को भी आती होगी शर्म इन पर
जो दिखावे को , कई राखियाँ बंधा कर बैठे है
जायेगे जब दुनिया से ये, लेगी राहत की साँसे धरती भी
जाने कब से उस के आंचल को, ये पाँव तले दबा कर बैठे है
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Wednesday, 19 December 2012
स्त्री होना ही सर्व नाश का कारण बना शायद
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उस बच्ची की आंते निकाल दी गयी आपरेशन कर के
ताकि उन में फ़ैल चुका 'गैंगरीन ' न ले ले उस की जान
पर जान बची कहाँ है उस में ,वो तो लाश भर है बस अब
उन अरमानों की लाश ,जो उस के माता पिता ने देखे होगे
उसे पराये शहर में पढने भेजने से पहले .......
उस के खुद के सपनों की भी लाश है वो ,वो चाहती थी
कंधे से कन्धा मिला कर चलना इस पुरुष प्रधान समाज में !
किस बात की सजा मिली है उसे , एक स्त्री होने की ?
कुछ नर पिशाचों ने उस की अस्मत को कुचल कर
उस के जिस्म को बेरहमी से खत्म करने की कोशिश की क्यूँ??
क्यूँ की उन के लिए वो महज़ एक भोग की वस्तु भर थी
नहीं वो भोग-वस्तु नहीं थी वो इस समाज का एक अहम हिस्सा थी
वो किसी की बहन थी बेटी थी वो एक पत्नी और माँ भी हो सकती थी
यदि उस के शरीर को यूँ कुचल न दिया गया होता बेरहमी से
कितना जी पायेगी वो आधे अधूरे शरीर के साथ?
जितना भी जिए पर उस का जीवन सिर्फ एक प्रश्न चिन्ह पर ही अटका रहेगा सदा
के क्या गलती थी मेरी जो ये सब हुआ ?महज़ स्त्री होना ही तो इस सर्व नाश का कारण रहा है शायद
कन्या भ्रूण हत्या ,बलात्कार ,दहेज़ के लिए उत्पीडन ,क्या ये सब ही स्त्री की नियति है ????
जरुर है आत्म मंथन की इस समाज को ,तलाशने होने इस प्रश्न -चिन्ह के जवाब
सिखाने होगे संस्कार अपने बेटों को भाइयों को ,संस्कार ही एक इंसान को इंसान बने रहने में मदद करते है
वरना पशुता की तरफ गया मनुष्य क्या कर सकता है ये हम देख ही रहे है
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